पर्णीय छिड़काव: अनाज फसलों में बेहतर उपज के लिए 5 खास उर्वरक
प्यारे किसान भाइयों,
क्या आप चाहते हैं कि आपके धान, गेहूँ या मक्का की पैदावार बढ़े, दाने भारी हों और फसल स्वस्थ रहे? इसके लिए सिर्फ मिट्टी में खाद डालना काफी नहीं है। कई बार फसल को कुछ खास पोषक तत्व तुरंत चाहिए होते हैं, खासकर फूल आने या दाना भरने के समय। ऐसे में पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) बहुत कारगर तरीका है।
पानी में पूरी तरह घुलनशील उर्वरकों को पत्तियों पर छिड़काव किया जाता है, जिससे पौधा तुरंत पोषक तत्व सोख लेता है। ये उर्वरक मिट्टी की खाद की तरह धीरे-धीरे नहीं, बल्कि तत्काल फसल को ऊर्जा देते हैं।
आज हम पाँच खास पानी में घुलनशील उर्वरकों के बारे में जानेंगे: कौन से हैं ये पाँच उर्वरक और इनका क्या काम है?
उर्वरक (NPK अनुपात) मुख्य भूमिका कब और क्यों उपयोग करें?
- 19:19:19 (बराबर मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) हरा-भरा विकास शुरुआती विकास में – जड़ें मजबूत, पत्तियाँ बड़ी और हरी
- 12:61:00 (अत्यधिक फास्फोरस) जड़ और शाख नर्सरी या रोपाई के बाद – जड़ों का तेजी से फैलाव, छोटे पौधे मजबूत
- 0:52:34 (फास्फोरस + पोटाश, नाइट्रोजन नहीं) फूल और दाना फूल आने के समय – अधिक फूल, अच्छा परागण, दाने गिरने से बचाव
- 13:0:45 (पोटाश ज्यादा, थोड़ा नाइट्रोजन) दाना भराव दाना भरने की अवस्था – दाने मोटे, भारी और चमकदार
- 0:0:50 (शुद्ध पोटाश) गुणवत्ता व तनाव सहनशीलता फसल की अंतिम अवस्था में – दानों का वजन बढ़े, सूखा या रोग से बचाव
इस्तेमाल की सही मात्रा और समय
सामान्य नियम: 5-10 ग्राम उर्वरक प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। हमेशा अपने स्थानीय खाद एवं बीज भंडार से खरीदे गए उत्पाद के लेबल पर दी गई मात्रा का पालन करें।
अब जानते हैं फसलवार कब और कौन सा उर्वरक डालें:
धान (Paddy) के लिए:
- कल्ले निकलने की अवस्था (20-45 दिन): 19:19:19 का छिड़काव करें। इससे कल्ले बढ़ते हैं, तने मजबूत होते हैं।
- बाली निकलने की अवस्था (45-65 दिन): 0:52:34 का उपयोग करें। इससे बाली (पैनिकल) में दानों की संख्या बढ़ती है।
- दाना भरने की अवस्था (90-110 दिन): 13:0:45 या 0:0:50 छिड़कें। इससे दाने भारी और चमकदार बनते हैं, और फसल समय से पहले पीली नहीं पड़ती।
गेहूँ (Wheat) के लिए:
- जड़ विकास व कल्ले बनाने का समय (25-40 दिन): 19:19:19 – जड़ें मजबूत बनाता है, पौधे हरे-भरे रहते हैं।
- बाली निकलने की अवस्था (50-70 दिन): 0:52:34 का उपयोग करें। इससे बाली में दानों की संख्या बढ़ती है।
- बाली निकलने के बाद या दाना भरने की अवस्था (लगभग 80-100 दिन): 13:0:45 या 0:0:50 – इससे बाली में दानों का बनना बेहतर होता है और दानों का वजन बढ़ता है, व सूखे या रोग से भी बचाव होता है।
मक्का (Maize) के लिए:
- प्रारंभिक विकास (4-5 पत्ती आने पर): 12:61:00 – यह मक्का की जड़ों को गहराई तक ले जाता है, जिससे पौधा मजबूत रहता है।
- नर फूल (टैसल) और मादा फूल (सिल्क) आने पर (फूल अवस्था): 0:52:34 – इससे भुट्टे पर दाने ठीक से लगते हैं, फूलों का झड़ना भी कम होता है।
- दाना भरने (मिल्क से डो स्टेज) पर: 13:0:45 या 0:0:50 – भुट्टे भारी, दाने मोटे और मीठे बनते हैं।
5 प्रैक्टिकल टिप्स (बेहतर परिणाम के लिए)
- सही समय पर स्प्रे करें: हमेशा सुबह जल्दी (7-9 बजे) या शाम को (4-6 बजे) जब हवा ठंडी हो और पत्तियों के रंध्र खुले हों। दोपहर की तपती धूप में स्प्रे न करें – इससे पत्तियाँ झुलस सकती हैं।
- पूरा पत्ता गीला करें: छिड़काव इस तरह करें कि फसल की 70-80% पत्तियाँ अच्छे से गीली हो जाएँ। जल की बूंदें बहने न दें।
- साफ पानी का उपयोग करें: हमेशा साफ, बिना गंदगी वाला पानी (अधिमानतः नल का या फिल्टर किया हुआ) इस्तेमाल करें। कठोर पानी (हार्ड वॉटर) से उर्वरक की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
- दवाओं के साथ मिलाकर स्प्रे: ये पानी घुलनशील उर्वरक अधिकतर कीटनाशकों और फफूंदनाशकों के साथ मिल सकते हैं। लेकिन मिलाने से पहले थोड़ी मात्रा में एक बाल्टी में मिलाकर देखें – यदि दूध जैसा या गोलियाँ न बनें तो सुरक्षित है।
- बार-बार न करें: एक सीजन में अलग-अलग अवस्था पर अधिकतम 2-3 स्प्रे ही पर्याप्त होते हैं। बार-बार स्प्रे करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।
ये उर्वरक आजकल अधिकतर कृषि दुकानों पर मिल जाते हैं। एक बार अपने खेत में कम से कम एक एकड़ पर परीक्षण करके देखें। सही समय और सही उर्वरक का छिड़काव आपकी फसल की पैदावार 8-10% तक बढ़ा सकता है, साथ ही दानों की गुणवत्ता भी सुधार सकता है।
अगर आपको किसी विशेष फसल या उर्वरक के बारे में और जानकारी चाहिए, तो पूछ सकते हैं। खेती को और लाभदायक बनाएँ!
