आपके मक्के में छिपा ज़हर: अफ्लाटॉक्सिन को समझें और उससे बचाव करें

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Preventing Aflatoxin in Maize Farming

आपके मक्के में छिपा ज़हर: अफ्लाटॉक्सिन को समझें और उससे बचाव करें

एक मक्का किसान के रूप में, आप अपनी फसल के लिए महीनों तक कड़ी मेहनत करते हैं। बुआई, निराई-गुड़ाई और कीटों से सुरक्षा में आप अपना समय और संसाधन लगाते हैं। लेकिन एक अदृश्य खतरा आपकी पूरी फसल का मूल्य कम कर सकता है और आपके परिवार, पशुओं तथा उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है। यह खतरा है अफ्लाटॉक्सिन, जो Aspergillus flavus नामक फफूंद द्वारा उत्पन्न एक खतरनाक विष (ज़हर) है।

अफ्लाटॉक्सिन एक गंभीर समस्या है, विशेष रूप से हमारे जैसे गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में, जहाँ यह खेत में खड़ी फसल तथा भंडारण के दौरान दोनों अवस्थाओं में संक्रमण कर सकता है। यह फफूंद अधिक नमी, सूखे के तनाव (ड्रॉट स्ट्रेस) या भुट्टों पर कीट क्षति होने पर तेजी से विकसित होती है। एक बार अफ्लाटॉक्सिन बनने के बाद, इसकी अधिक मात्रा मनुष्यों के लिए घातक हो सकती है। वहीं, कम मात्रा में लंबे समय तक सेवन करने से यकृत (लीवर) कैंसर, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। पशु भी इससे सुरक्षित नहीं हैं। उनके चारे में अफ्लाटॉक्सिन होने पर उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है और अधिक मात्रा में यह मृत्यु का कारण भी बन सकता है।

अपनी फसल और परिवार की सुरक्षा कैसे करें

अच्छी बात यह है कि उचित कृषि पद्धतियों को अपनाकर अफ्लाटॉक्सिन के संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित दो मुख्य उपाय अपनाएँ –

खेत में:

अपनी फसल को स्वस्थ रखने पर ध्यान दें। अफ्लाटॉक्सिन-प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें और उचित सिंचाई प्रबंधन अपनाकर फसल को सूखे के तनाव से बचाएँ। सबसे महत्वपूर्ण है सही समय पर कटाई करना। फसल की समय से पहले कटाई न करें और यदि समय से पहले वर्षा हो जाए तो विशेष सावधानी बरतें। फसल पकने के बाद भुट्टों को लंबे समय तक खेत में न छोड़ें।

कटाई के बाद:

यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। नम परिस्थितियों में यह फफूंद बहुत तेजी से बढ़ती है। इसलिए कटाई के तुरंत बाद मक्के को अच्छी तरह सुखाएँ। सुरक्षित भंडारण के लिए दानों की नमी 15% से कम (और लंबे समय के भंडारण के लिए 9% से भी कम) रखें। उचित सुखाने की विधियाँ अपनाएँ तथा भुट्टों को साफ, सूखे और अच्छी हवा वाले भंडारण स्थानों में रखें।

हर्मेटिक (वायुरोधी) भंडारण बैग नमी और कीटों को बाहर रखने में अत्यंत प्रभावी होते हैं, जिससे फफूंद का जोखिम भी कम हो जाता है। भंडारित मक्के की नियमित जाँच करें और फफूंद लगे, रंग बदले हुए या क्षतिग्रस्त भुट्टों को तुरंत अलग कर दें।

यदि आपको अपनी उपज में अफ्लाटॉक्सिन की आशंका हो, तो इसकी जाँच के लिए त्वरित परीक्षण किट (Rapid Test Kits) उपलब्ध हैं। याद रखें, आपके मक्के की गुणवत्ता का सीधा संबंध बाजार में मिलने वाले मूल्य से है। इन सरल लेकिन प्रभावी उपायों को अपनाकर आप न केवल अपने परिवार और पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि अपनी मेहनत का बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

सुरक्षित रहें और स्वस्थ फसल की कटाई करें!

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Author: Dr. Chandra Prakash Senior Regional Agronomist at Mosaic India, (Ph.D. Agronomy).

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