गेहूं की उच्च उत्पादकता में जिंक की भूमिका

  • Mosaic India
  • Crop Nutrition
  • गेहूं की उच्च उत्पादकता में जिंक की भूमिका
Role of Zinc in High Wheat Productivity

गेहूं की उच्च उत्पादकता में जिंक की भूमिका

परिचय:

गेहूं भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक है, जिसकी उत्पादकता सीधे तौर पर पोषण प्रबंधन पर निर्भर करती है। किसान प्रायः नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे प्रमुख पोषक तत्वों पर ध्यान देते हैं, लेकिन सूक्ष्म पोषक तत्वों की अनदेखी अक्सर उत्पादन क्षमता को सीमित कर देती है। इनमें जिंक (Zinc) एक ऐसा आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो गेहूं की प्रारंभिक वृद्धि, टिलर विकास, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता तथा दानों के भराव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारतीय मिट्टियों के एक बड़े हिस्से में जिंक की उपलब्धता सीमित पाई जाती है, जिसके कारण गेहूं की फसल अपनी वास्तविक उत्पादन क्षमता तक नहीं पहुंच पाती। इसलिए संतुलित पोषण प्रबंधन में जिंक का समुचित उपयोग आज की आवश्यकता बन गया है।

गेहूं में जिंक का महत्व:

जिंक पौधों में अनेक शारीरिक एवं जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं का अभिन्न हिस्सा है। जिंक के प्रयोग के निम्न महत्वपूर्ण लाभ गेहूँ की फसल में होते है।

1. एंजाइमों की सक्रियता बढ़ाता है

जिंक अनेक एंजाइमों का घटक एवं सक्रिय कर्ता होता है। यह पौधे के अंदर होने वाली विभिन्न जैव-रासायनिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।

2. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में सहायता करता है

जिंक क्लोरोफिल निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता बढ़ती है और विकास अधिक होता है।

3. प्रोटीन एवं न्यूक्लिक अम्लों के निर्माण में सहायक

जिंक प्रोटीन संश्लेषण तथा DNA/RNA के निर्माण में योगदान देता है। इससे दानों का विकास बेहतर होता है और उपज बढ़ती है।

4. पौध वृद्धि हार्मोन (Auxin) के निर्माण में भूमिका

जिंक ऑक्सिन हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है। इससे पौधे की ऊँचाई, जड़ विकास और टिलर (कल्लों) की संख्या बढ़ती है।

5. कल्ले (Tillers) एवं उपज  में वृद्धि

पर्याप्त जिंक उपलब्ध होने पर उत्पादक कल्लों की संख्या बढ़ती है। बालियों की लंबाई, प्रति बाली दानों की संख्या तथा दानों का वजन बढ़ता है। परिणामस्वरूप गेहूँ की कुल उपज में वृद्धि होती है।

जिंक की कमी एक महत्वपूर्ण चुनौती:

भारतीय कृषि में जिंक की कमी सबसे व्यापक सूक्ष्म पोषक तत्व समस्याओं में से एक है। विशेष रूप से उच्च pH वाली, चूना युक्त एवं कम जैविक पदार्थ वाली मिट्टियों में इसकी समस्या अधिक देखी जाती है।

जिंक की कमी के प्रमुख कारण हैं:

  • मिट्टी का क्षारीय (Alkaline) होना।
  • जैविक कार्बन का निम्न स्तर।
  • फास्फोरस उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग।
  • लगातार अधिक उत्पादन लेने वाली कृषि प्रणाली।
  • सूक्ष्म पोषक तत्वों की नियमित पूर्ति न करना।

गेहूं में जिंक कमी के लक्षण:

जिंक की कमी प्रारंभिक अवस्था से ही फसल की वृद्धि को प्रभावित करना शुरू कर देती है। इसके प्रमुख लक्षण निम्न हैं:

  • पौधों की बढ़वार रुक जाना (Stunted growth)
  • पत्तियों का छोटा एवं संकीर्ण होना
  • नई पत्तियों में हरिमाहीनता (पीली पड़ना)
  • पत्तियों पर सफेद-भूरे धब्बे दिखाई देना
  • कल्लों की संख्या कम होना
  • दानों एवं उपज में कमी आना

जिंक प्रबंधन: अधिक उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मिट्टी में प्रयोग (Soil Application)

जिंक की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बुवाई के समय खेत में जिंक सल्फेट का प्रयोग लाभकारी  माना जाता है।

फोलियर स्प्रे (Foliar Application)

जहां कमी के लक्षण दिखाई दें, वहां पत्तियों पर मोज़ेक मैग्ना जिंक का छिड़काव त्वरित सुधार प्रदान करता है।

सिफारिश: (250 मिली प्रति एकड़)

  • पहली बार 30-35 दिन की अवस्था में
  • दूसरा छिड़काव 45-50 दिन पर

संतुलित पोषण के साथ अधिक लाभ:

जिंक का सर्वाधिक लाभ तब प्राप्त होता है जब इसे संतुलित पोषण प्रबंधन के तहत नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं जैविक खादों के साथ उपयोग किया जाए। मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन न केवल जिंक की प्रभावशीलता बढ़ाता है बल्कि उर्वरकों के निवेश पर बेहतर प्रतिफल भी सुनिश्चित करता है।

आधुनिक गेहूं उत्पादन में जिंक केवल एक सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं, बल्कि उच्च उपज प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए किसान यदि संतुलित उर्वरक प्रबंधन के साथ जिंक का वैज्ञानिक उपयोग अपनाएं, तो वे न केवल अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं बल्कि गेहूं की गुणवत्ता और लाभप्रदता में भी उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं।

Share this post
Author: Vishal UpadhyaySenior Regional Agronomist at Mosaic India, (M.B.A. in Agribusiness, M.Sc. in Agriculture).

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *